मार्च में करें इन सब्जियों की खेती, गर्मी के सीजन में होगी लाखों की कमाई

Cultivate these Vegetables

Cultivate these Vegetables – मार्च और मार्च का महीना सब्जियों की खेती के लिए सबसे अनुकूल समय माना जाता है। यदि आपका खेत इस समय खाली है, तो 14 मार्च से पहले कुछ चुनिंदा फसलों की बुवाई करके आप 35 से 40 दिनों में कमाई शुरू कर सकते हैं। गर्मी के मौसम में बाजार में सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ती है, जबकि आपूर्ति सीमित हो जाती है। ऐसे में अगेती और पछेती सब्जियों की खेती किसानों को अच्छा लाभ दे सकती है। सही किस्म, उचित दूरी और समय पर सिंचाई प्रबंधन अपनाकर चार से पांच महीनों तक निरंतर आय प्राप्त की जा सकती है।

अगेती सब्जियां: जल्दी तैयार, ज्यादा फायदा

भिंडी गर्मियों की सबसे लाभदायक फसलों में से एक है। 14 मार्च से पहले बुवाई करने पर इसकी तुड़ाई 45 से 50 दिनों में शुरू हो जाती है और 4 से 5 महीने तक उत्पादन देती है। बाजार में इसका भाव 50 से 70 रुपये प्रति किलो तक मिल सकता है। बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत हाइब्रिड किस्मों का चयन करें।
लौकी की मांग गर्मी में लगातार बनी रहती है। इसे समतल क्यारियों या मचान पद्धति दोनों में उगाया जा सकता है। 60 से 65 दिनों में उत्पादन शुरू हो जाता है और लंबे समय तक तुड़ाई चलती रहती है।
खीरा सलाद वर्ग की प्रमुख फसल है, जिसकी गर्मियों में भारी मांग रहती है। 35 से 40 दिनों में तैयार होकर बाजार में अच्छी कीमत दिलाता है।
तोरी और करेला कम लागत में अधिक लाभ देने वाली बेल वाली फसलें हैं। करेला विशेष रूप से पूरी गर्मी में स्थिर आय देता है।

पछेती सब्जियां: कम प्रतिस्पर्धा, ऊंचा भाव

फूलगोभी की गर्मी में कम खेती होती है, इसलिए उस समय बाजार में इसका थोक भाव 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है।
मूली और धनिया 10 मार्च से 14 मार्च के बीच बोने पर बेहतर दाम दिलाते हैं। गर्मी में धनिया का भाव 150 से 250 रुपये प्रति किलो तक मिल सकता है।
लाल चौलाई तेज कमाई का विकल्प है। यह 25 से 30 दिनों में तैयार हो जाती है और बार-बार कटाई कर बाजार में बेची जा सकती है।

खेती के जरूरी सुझाव

हमेशा उन्नत और हाइब्रिड किस्मों का चयन करें, क्योंकि ये अधिक उत्पादन और मौसम सहनशीलता प्रदान करती हैं। बुवाई बेड विधि से करें ताकि जल निकासी और सिंचाई संतुलित रहे। बेल वाली फसलों में लाइन से लाइन की दूरी 7 से 8 फीट रखें। समय पर खाद, सिंचाई और कीट प्रबंधन करने से पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। सही योजना और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर की गई खेती आपको पूरे सीजन में बेहतर और स्थिर आय दे सकती है।

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