Saving A/C Transaction Limit – साल 2026 में सेविंग अकाउंट से जुड़े नियमों को लेकर आयकर विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिससे आम खाताधारकों को अपने बैंक लेन-देन पर पहले से अधिक सावधानी बरतनी होगी। सरकार का उद्देश्य टैक्स चोरी, बेनामी लेन-देन और संदिग्ध नकद ट्रांजैक्शन पर रोक लगाना है। अब यदि कोई व्यक्ति अपने बचत खाते में बार-बार बड़ी नकद जमा या निकासी करता है और उसका आय स्रोत स्पष्ट नहीं होता, तो आयकर विभाग उस खाते की जांच शुरू कर सकता है। कई लोग सोचते हैं कि सेविंग अकाउंट पूरी तरह निजी होता है, लेकिन बैंक हर बड़े लेन-देन की रिपोर्ट सिस्टम के जरिए संबंधित विभाग को भेजता है। खासकर वित्तीय वर्ष में एक निश्चित सीमा से अधिक कैश जमा करने पर नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए खाताधारकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने आय के अनुसार ही लेन-देन करें और हर ट्रांजैक्शन का उचित रिकॉर्ड रखें ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके।
कितनी नकद जमा पर आ सकता है नोटिस
बचत खाते में बड़ी रकम जमा करने वालों पर अब विशेष नजर रखी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये या उससे अधिक नकद जमा करता है तो बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को देता है। यह प्रक्रिया ऑटोमैटिक रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए होती है जिसे SFT (Statement of Financial Transaction) कहा जाता है। इसके बाद विभाग खाताधारक की आय, रिटर्न और बैंकिंग गतिविधियों का मिलान करता है। यदि जमा की गई राशि घोषित आय से मेल नहीं खाती तो नोटिस जारी किया जा सकता है। कई बार लोग रिश्तेदारों या दोस्तों के पैसे अपने खाते में जमा कर देते हैं, जो आगे चलकर समस्या बन जाता है क्योंकि विभाग उस रकम को आपकी आय मान सकता है। इसलिए बिना उचित दस्तावेज के बड़ी नकद राशि जमा करने से बचना चाहिए। बेहतर होगा कि बड़े भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करें और हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर आसानी से जवाब दिया जा सके।
बार-बार कैश निकालने पर भी होगी जांच
केवल जमा ही नहीं, बल्कि बार-बार बड़ी नकद निकासी भी अब जांच के दायरे में आ सकती है। यदि कोई खाताधारक नियमित रूप से भारी मात्रा में कैश निकालता है और उसका उपयोग स्पष्ट नहीं होता तो बैंक इस गतिविधि को संदिग्ध मान सकता है। लगातार उच्च राशि की निकासी मनी लॉन्ड्रिंग या अवैध कारोबार की आशंका पैदा करती है, इसलिए वित्तीय संस्थान ऐसे खातों को चिन्हित कर रिपोर्ट भेजते हैं। आयकर विभाग ऐसे मामलों में खाताधारक से धन के उपयोग का स्पष्टीकरण मांग सकता है। कई बार व्यापारिक गतिविधि होने पर चालान, बिल या भुगतान रिकॉर्ड दिखाने से मामला साफ हो जाता है, लेकिन व्यक्तिगत खातों में बिना कारण अधिक निकासी समस्या खड़ी कर सकती है। इसलिए कोशिश करें कि बड़े भुगतान डिजिटल माध्यम से करें और जरूरत पड़ने पर ही नकद निकालें। इससे न केवल पारदर्शिता बनी रहती है बल्कि भविष्य में आयकर नोटिस आने की संभावना भी काफी कम हो जाती है।
किन ट्रांजैक्शन पर बैंक तुरंत रिपोर्ट करता है
कुछ प्रकार के लेन-देन ऐसे होते हैं जिनकी सूचना बैंक तुरंत उच्च अधिकारियों और आयकर विभाग तक पहुंचाता है। जैसे अचानक बड़ी रकम जमा होना, कई खातों के बीच बार-बार धन ट्रांसफर, या अलग-अलग शाखाओं में बार-बार कैश डिपॉजिट करना। इसके अलावा यदि एक ही व्यक्ति कई खातों का उपयोग करके रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में जमा करता है तो इसे “स्ट्रक्चरिंग” माना जाता है और यह जांच का बड़ा कारण बनता है। क्रेडिट कार्ड बिल का असामान्य रूप से अधिक भुगतान भी विभाग की नजर में आ सकता है। कई लोग सोचते हैं कि छोटी-छोटी रकम जमा करने से जांच नहीं होगी, लेकिन बैंकिंग सिस्टम अब पूरी तरह डिजिटल है और सभी गतिविधियां रिकॉर्ड होती हैं। इसलिए पारदर्शी लेन-देन करना ही सुरक्षित तरीका है। अपने PAN और आधार को बैंक खाते से लिंक रखना भी जरूरी है, क्योंकि केवाईसी अधूरा होने पर खाता अस्थायी रूप से फ्रीज भी किया जा सकता है।
खाताधारकों के लिए जरूरी सावधानियां
खाताधारकों को सबसे पहले अपने बैंक खाते का उपयोग केवल वैध आय और व्यक्तिगत जरूरतों के लिए करना चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति का पैसा अपने खाते में रखने से बचें, क्योंकि आयकर विभाग उसे आपकी आय मान सकता है। हर बड़ी राशि के लिए उचित दस्तावेज, जैसे सैलरी स्लिप, बिजनेस बिल, एग्रीमेंट या गिफ्ट डीड सुरक्षित रखें। यदि आपको किसी रिश्तेदार से बड़ी रकम मिलती है तो उसका लिखित प्रमाण अवश्य बनाएं। आयकर रिटर्न समय पर भरना भी बहुत जरूरी है, क्योंकि विभाग बैंक डाटा और रिटर्न का मिलान करता है। साथ ही डिजिटल भुगतान, यूपीआई और नेट बैंकिंग का अधिक उपयोग करें ताकि ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड अपने आप सुरक्षित रहे। समय-समय पर बैंक स्टेटमेंट जांचते रहें और किसी अनजान ट्रांजैक्शन की तुरंत सूचना बैंक को दें। इन सावधानियों का पालन करने से आप अनावश्यक नोटिस, जांच और बैंकिंग परेशानियों से आसानी से बच सकते हैं।







